जीवन शैली

ख़ुदकुशी का ख़्याल अपने मन से कैसे निकालें

किसी भी परेशानी, दुःख, गुस्सा, तनाव या डिप्रेशन के दबाव में आकर आत्महत्या का विचार करना बहुत ही बड़ी कायरता है। कभी-कभी हमारे जीवन में घोर निराशा छा जाती है और हमारा मन विचलित होकर बहकने लगता है और हमें गलत कदम उठाने के लिए उकसाता है। ऐसे नकारात्मक विचार कभी खुद भी मन में आते हैं और कभी दूसरों के कारण यह दूसरों के दबाव में भी आ सकते हैं। लेकिन, हम सकारात्मक सोच, मोटिवेशन, पारिवारिक वातावरण से ऐसी परिस्थितियों से सफलतापूर्वक बाहर निकल सकते हैं।

खाली दिमाग शैतान का घर होता है। इसलिए, परेशानी के दौर में खाली या अकेले रहने से पूरी तरह बचिए। कोई ना कोई लक्ष्य कार्य निर्धारित करके उसे पाने के लिए लगातार मेहनत करते रहिए। हालांकि जब हम कुछ पाने के लिए बार-बार कोशिश करते हैं और वह ना मिल पाए तो झुंझलाहट, गुस्सा, निराशा, हताशा, फ्रस्ट्रेशन होना स्वाभाविक है। लेकिन, इतना होने पर भी दुनिया छोड़ने का कोई कारण नहीं। संसार में अपार संभावनाएं हैं। आपको कहीं ना कहीं सफलता जरूर मिल ही जाएगी। यह सोचिए कि हमसे निचले स्तर पर भी बहुत लोग हैं वह भी जी रहे हैं और खुश रहते हैं।

जब भी कभी आत्महत्या का विचार मन में आए, तो अपने परिवार और बच्चों के बारे में सोचना शुरु कर दें, जो आपको बहुत प्यार करते हैं। आप पर निर्भर हैं, आपके बिना नहीं रह सकते, खुद की जान लेने का ख्याल उन सब की जिंदगी को बर्बाद करने वाला है। अगर आपको कोई परेशानी है तो अपने घर वालों, दोस्तों या किसी करीबी को जरूर बताएं। ऐसी कोई समस्या नहीं है जिसका समाधान न किया जा सके और यदि उस परेशानी का हल नहीं है तो भी दूसरे को अपनी बात बता देने से मन हल्का हो जाता है।

कभी-कभी दूसरों के व्यवहार से, आलोचनाओं से, अपमान से, चिढ़ाने से मन में बहुत निराशा छा जाती है और ऐसे ख्याल आने लगते हैं। लेकिन, इस दौरान हम यह भूल जाते हैं कि अपने मां-बाप, पति पत्नी बच्चों के बारे में जिनके लिए हमारी बहुत बड़ी जिम्मेदारी बनती है, विशेष तौर पर माता और पिता जिन्होंने जिंदगी की परेशानियों को झेल कर हमें पाला और खुशियां ददीं। अब हमारी भी जिम्मेदारी है कि उनको खुश रखें, उनको दुख देने की कोशिश ना करें किसी दूसरे की बातों के कारण अपनों को जिंदगी भर के लिए तड़पता छोड़ देना बिल्कुल भी उचित नहीं है।

लोग तो सभी के लिए कुछ ना कुछ बातें बनाते ही हैं। वे आपके बारे में बात करेंगे, आलोचना करेंगे, खुद तो घर जाकर आराम करेंगे और आप उनकी बातों को दिल में बैठा कर चिंता और तनाव में लग जाएंगे। खैर, जब कभी आपके साथ ऐसा हो तो तुरंत अपने परिवार, माता-पिता, पति-पत्नी, बच्चों के बारे में सोचना शुरु कर दें। उनको खुश रखना ही हमारे जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य है। ऐसा सोचने से भी सभी नकारात्मक बातें मन से निकल सकते हैं।

बहुत से विद्यार्थी परीक्षा में फेल होने पर या कम अंक आने पर भी ऐसे आत्मघाती कदम उठाने की कोशिश करते हैं। उन पर अपनी सफलता से और कई लोगों की उम्मीदें आशाएं बंधी होती हैं। उनका पूरा करने का भारी दबाव होता है और असफल होने पर निराश होना भी लाजमी है। लेकिन तब भी यह सोच कर मन को शांत करना चाहिए कि उनके नीचे भी कई स्टूडेंट हैं। जो काफी मेहनत के बावजूद औसत अंक भी नहीं ला पाते या बहुतों को तो शिक्षा ही नहीं मिल पाती है। महान वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन और थॉमस अल्वा एडिसन बहुत बड़े उदाहरण हैं जिन्होंने पढ़ाई में अच्छे नंबर ना आने पर भी दुनिया में अद्वितीय उपलब्धियां हासिल की।

अपार और असीमित संभावनाओं वाली इस दुनिया में खुदकुशी के बारे में कभी भूल कर भी ना सोचें। हमेशा अच्छे दोस्तों की संगत में रहे। अच्छी किताबें पढ़ें अच्छी शिक्षा देने वाली फिल्में देखें इससे विचारों को सकारात्मक ऊर्जा मिलेगी योगा शारीरिक व्यायाम और मेडिटेशन का अभ्यास करें इनसे भी तनाव और डिप्रेशन को कम करने में सहायता मिलती है।

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